आत्म-अवलोकन क्या हैं, क्यों आवश्यक और कैसे करें?
आत्म-अवलोकन से मनुष्य उस अवस्था तक पहुँच जाता है जहाँ जानने के लिए कुछ शेष नहीं रह जाता। यही सर्वोच्च आनंद …
आत्म-अवलोकन से मनुष्य उस अवस्था तक पहुँच जाता है जहाँ जानने के लिए कुछ शेष नहीं रह जाता। यही सर्वोच्च आनंद …
निराकार का ध्यान कैसे करें? निराकार पर ध्यान देने का अर्थ बस इतना है कि आप आकार पर ध्यान नहीं दे …
योग में ‘समाधि’ किस अवस्था को कहते हैं? बुद्धि के सम हो जाने को समाधि कहते हैं, ‘सम’ कर ‘बुद्धि’ । …
अगर आप जीना चाहते हैं, जीवन मात्र के अतुलनीय परम आनंद को उपलब्ध होना चाहते हैं, तो आपके जीवन में ध्यान …
क्या ध्यान कोई शरीर से किया जाने वाला कर्म होता है? आपने ज्यादातर लोगों को अक्सर ऐसे कहते सुना होगा कि …
साधकों, आध्यात्मिक मुक्ति कोई ऐसी अवधारणा नहीं है जिसे केवल पढ़कर या समझकर प्राप्त किया जा सके। यह अपने बंधनों, माया …
यह मंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं है, बल्कि यह कृष्ण भक्तों के हृदय की पुकार है, उनकी शरणागति है और …
“योग चित्त वृत्ति निरोध का अर्थ है मन की चंचल और परिवर्तनशील वृत्तियों का शांत हो जाना। जब साधक विचारों से …
“राधे राधे” कृष्ण मंत्र श्री राधा के नाम की महिमा और राधे–राधे जप के लाभ। देवी राधा राजा वृषभानु और रानी …
भजन क्यों करें? अगर हमें अभी इसी पल सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण अगर कुछ है, तो वह केवल आत्मिक शांति है। यह …
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