आत्म-अवलोकन क्या हैं, क्यों आवश्यक और कैसे करें?
आत्म-अवलोकन से मनुष्य उस अवस्था तक पहुँच जाता है जहाँ जानने के लिए कुछ शेष नहीं रह जाता। यही सर्वोच्च आनंद …
आत्म-अवलोकन से मनुष्य उस अवस्था तक पहुँच जाता है जहाँ जानने के लिए कुछ शेष नहीं रह जाता। यही सर्वोच्च आनंद …
मन विचलित हो जाता है जब हम कोई कार्य हाथ में लेते हैं, पर उस पर एकाग्र होकर काम नहीं कर …
मेरा मन व्याकुल क्यों होता है? देखिए, मन केवल आपका ही नहीं, अधिकांश लोगों का व्याकुल होता है। मन स्वयं को …
जहाँ मन टिक जाता है, वह माया है; जिसका दूर जाना ही दुख और भय है, वह माया है। माया के …
साधकों, आध्यात्मिक मुक्ति कोई ऐसी अवधारणा नहीं है जिसे केवल पढ़कर या समझकर प्राप्त किया जा सके। यह अपने बंधनों, माया …
“योग चित्त वृत्ति निरोध का अर्थ है मन की चंचल और परिवर्तनशील वृत्तियों का शांत हो जाना। जब साधक विचारों से …
माया को केवल जान लेना ही माया से पार पाना, माया वास्तव में कहीं बाहर मौजूद कोई ठोस वस्तु नहीं है, …
क्या आप भी आत्मा को भूत या चुड़ैल मानते हैं? वेदों के सबसे बड़े सत्य के साथ हम क्या कर रहे …
इस संसार में निवास करने वाले सभी जीव सदा अपने सुख की ही कामना करते हैं। हर कोई चाहता है कि …
“नेति नेति” साधना की गहन प्रक्रिया की खोज करें, जो साधकों को उनके सच्चे स्वरूप को पहचानने की ओर मार्गदर्शन करती …
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