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‘यदा यदा हि धर्मस्य’ श्लोक, अर्थ और व्याख्या (भगवद्गीता 4.7 & 8)

भगवान ने अर्जुन से कहा था, जिसे आप गीता के चौथे अध्याय ज्ञानकर्मसंन्यासयोग के सातवें और आठवें श्लोक में पढ़ते हैं। …

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‘सा विद्या या विमुक्तये’ श्लोक, अर्थ और उपदेश (विष्णुपुराण 1.19.41 )

"सा विद्या या विमुक्तये" श्लोक, अर्थ और उपदेश

महावाक्य सुना होगा क्योंकि इसका आध्यात्मिक ज्ञान में कि इस के लिए अत्यंत महत्व है। वास्तव में विद्या वह है जो …

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‘नमस्कार’ और ‘नमस्ते’ क्या हैं?

What Are "Namaskar" and "Namaste"?

“नमस्कार” और “नमस्ते” क्या हैं? भारतीय संस्कृति में हम किसी का अभिवादन करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए …

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‘मन ही मित्र, मन ही शत्रु’ लेकिन कैसे?

man hi mitra man hi shatru

भगवान कृष्ण, गुरु नानक, संत कबीर और ऐसे अनेक महापुरुषों ने मन को बुद्धि के अधीन रखना अत्यंत आवश्यक बताया है। …

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श्रीमद् भगवत गीता के आध्यात्मिक अनमोल वचन

श्रीमद् भगवत गीता के आध्यात्मिक अनमोल वचन4

“श्रीमद् भगवद् गीता के आध्यात्मिक ज्ञान मानव जीवन के लिए अमूल्य धरोहर हैं। यहाँ मैंने श्रीमद् भगवद् गीता के उन अनमोल …

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