‘कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन’ — श्लोक का अर्थ और उपदेश
मैं भगवद्गीता को आज तक पढ़े गए सभी शास्त्रों में सबसे श्रेष्ठ आध्यात्मिक ग्रंथ मानता हूं। गीता संपूर्ण है — यह …
मैं भगवद्गीता को आज तक पढ़े गए सभी शास्त्रों में सबसे श्रेष्ठ आध्यात्मिक ग्रंथ मानता हूं। गीता संपूर्ण है — यह …
आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति और मानव जीवन के सबसे बड़े उद्देश्य—मोक्ष—को प्राप्त करने के लिए ही योग का अभ्यास किया जाता …
सच्चा प्रेम और झूठा प्रेम By Bodhavriksha हमने सुना है कि प्रेम एक प्यारा अनुभव है। बहुत किस्से-कहानियाँ हैं। लोग कहते …
जो आत्म नहीं है, उसे उसी रूप में जानना आत्मज्ञान होता है। विचार आते हैं और जाते हैं, चीजें बदल जाती …
ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र मंत्र के बोल : ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः भगवान कृष्ण को समर्पित इस ‘ओम नमो …
“नमस्कार” और “नमस्ते” क्या हैं? भारतीय संस्कृति में हम किसी का अभिवादन करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए …
मन अनेक इच्छाओं, लक्ष्यों और बाहरी आकर्षणों के कारण भटकता रहता है। वह भविष्य की चिंताओं और अतीत की स्मृतियों में …
भगवान कृष्ण, गुरु नानक, संत कबीर और ऐसे अनेक महापुरुषों ने मन को बुद्धि के अधीन रखना अत्यंत आवश्यक बताया है। …
परमात्मा कौन है? परमात्मा आपका ही पवित्र स्वरूप है क्योंकि परम और आत्म को मिलाकर ही परमात्मा शब्द बनता है। परम …
अगर आप मुण्डक उपनिषद् के तृतीय मुण्डक के द्वितीय खंड के नौवें श्लोक को पढ़ेंगे तो आप वहां यह वाक्य पाएंगे …