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आत्म बोध उद्धरण दर्शन धर्मग्रंथ ध्यान भक्ति मंत्र विज्ञान

हमारा मन विचलित क्यों होता है?

by Shri Nikhil

मन विचलित हो जाता है जब हम कोई कार्य हाथ में लेते हैं, पर उस पर एकाग्र होकर काम नहीं कर …

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मेरा मन व्याकुल क्यों होता है?

by Shri Nikhil

मेरा मन व्याकुल क्यों होता है? देखिए, मन केवल आपका ही नहीं, अधिकांश लोगों का व्याकुल होता है। मन स्वयं को …

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माया-जगत की पीड़ा से कैसे बचें और पूर्ण मुक्ति कैसे पाएं?

by Shri Nikhil

जहाँ मन टिक जाता है, वह माया है; जिसका दूर जाना ही दुख और भय है, वह माया है। माया के …

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योग में ‘समाधि’ और ‘समाधिस्थ’ किसे कहते हैं?

by Shri Nikhil

योग में  ‘समाधि’ किस अवस्था को कहते हैं? बुद्धि के सम हो जाने को समाधि कहते हैं, ‘सम’ कर ‘बुद्धि’ । …

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‘नमामि शमीशान’ स्तुति का अर्थ और तात्पर्य

by Shri Nikhil

इस लेख में मैंने भगवान शिव की प्रसिद्ध ‘नमामि शमीशान’ स्तुति – रुद्राष्टकम् के संपूर्ण बोल, सरल हिन्दी अर्थ तथा उसके …

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ध्यान क्यों आवश्यक है जीवन जीने के लिए?

by Shri Nikhil

अगर आप जीना चाहते हैं, जीवन मात्र के अतुलनीय परम आनंद को उपलब्ध होना चाहते हैं, तो आपके जीवन में ध्यान …

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क्या ध्यान कर्म है और ध्यानस्थ कैसा होता हैं?

by Shri Nikhil

क्या ध्यान कोई शरीर से किया जाने वाला कर्म होता है? आपने ज्यादातर लोगों को अक्सर ऐसे कहते सुना होगा कि …

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आध्यात्मिक मुक्ति क्या है?

by Shri Nikhil

साधकों, आध्यात्मिक मुक्ति कोई ऐसी अवधारणा नहीं है जिसे केवल पढ़कर या समझकर प्राप्त किया जा सके। यह अपने बंधनों, माया …

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श्रीमद् भगवत गीता के आध्यात्मिक अनमोल वचन

by Shri Nikhil

“श्रीमद् भगवद् गीता के आध्यात्मिक ज्ञान मानव जीवन के लिए अमूल्य धरोहर हैं। यहाँ मैंने श्रीमद् भगवद् गीता के उन अनमोल …

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‘प्रज्ञानं ब्रह्म’ महावाक्य आपको क्या संदेश देता हैं?

by Shri Nikhil

प्रज्ञानं ब्रह्म भी अद्वैत परम्परा के चार महावाक्यों में से एक अत्यंत महत्वपूर्ण महावाक्य है, जिसके प्रचार और व्यवस्थित दार्शनिक प्रतिपादन …

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