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अनमोल वचन दर्शन और शास्त्रज्ञान भगवान कृष्ण भगवान शिव मन और चेतना योग वेदांत

आत्म-अवलोकन क्या हैं, क्यों आवश्यक और कैसे करें?

by Shri Nikhil

आत्म-अवलोकन से मनुष्य उस अवस्था तक पहुँच जाता है जहाँ जानने के लिए कुछ शेष नहीं रह जाता। यही सर्वोच्च आनंद …

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‘परा विद्या’ और ‘अपरा विद्या’ क्या है और इनमें क्या अंतर है?

by Shri Nikhil

साधकों, परा विद्या और अपरा विद्या क्या हैं? इनमें क्या अंतर है? मुण्डक उपनिषद के में विद्वान ऋषि अंगीरथ इसका उत्तर …

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शिव स्वर्णमाला स्तुति ‘ईशगिरीश नरेश’ के बोल,अर्थ और जानकारी

by Shri Nikhil

इस लेख में मैंने शिव स्वर्णमाला स्तुति ‘ईशगिरीश नरेश’ के संपूर्ण बोल, प्रत्येक श्लोक का सरल हिन्दी अर्थ तथा इस स्तुति …

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माया कैसे बनती है? क्या माया आपही से उत्पन्न होती है?

by Shri Nikhil

माया कैसे बनती है? क्या माया आपसे ही उत्पन्न होती है? माया का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता। उसका अपना कोई …

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मेरा मन व्याकुल क्यों होता है?

by Shri Nikhil

मेरा मन व्याकुल क्यों होता है? देखिए, मन केवल आपका ही नहीं, अधिकांश लोगों का व्याकुल होता है। मन स्वयं को …

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माया-जगत की पीड़ा से कैसे बचें और पूर्ण मुक्ति कैसे पाएं?

by Shri Nikhil

जहाँ मन टिक जाता है, वह माया है; जिसका दूर जाना ही दुख और भय है, वह माया है। माया के …

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‘नमामि शमीशान’ स्तुति का अर्थ और तात्पर्य

by Shri Nikhil

इस लेख में मैंने भगवान शिव की प्रसिद्ध ‘नमामि शमीशान’ स्तुति – रुद्राष्टकम् के संपूर्ण बोल, सरल हिन्दी अर्थ तथा उसके …

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