‘यदा यदा हि धर्मस्य’ श्लोक, अर्थ और व्याख्या (भगवद्गीता 4.7 & 8)
भगवान ने अर्जुन से कहा था, जिसे आप गीता के चौथे अध्याय ज्ञानकर्मसंन्यासयोग के सातवें और आठवें श्लोक में पढ़ते हैं। …
भगवान ने अर्जुन से कहा था, जिसे आप गीता के चौथे अध्याय ज्ञानकर्मसंन्यासयोग के सातवें और आठवें श्लोक में पढ़ते हैं। …
महावाक्य सुना होगा क्योंकि इसका आध्यात्मिक ज्ञान में कि इस के लिए अत्यंत महत्व है। वास्तव में विद्या वह है जो …
‘न जायते म्रियते वा कदाचिन्’ श्लोक का अर्थ और व्याख्या भगवद्गीता के दूसरे अध्याय का बीसवाँ श्लोक इस प्रकार है— न …
मैं भगवद्गीता को आज तक पढ़े गए सभी शास्त्रों में सबसे श्रेष्ठ आध्यात्मिक ग्रंथ मानता हूं। गीता संपूर्ण है — यह …
आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति और मानव जीवन के सबसे बड़े उद्देश्य—मोक्ष—को प्राप्त करने के लिए ही योग का अभ्यास किया जाता …
सच्चा प्रेम और झूठा प्रेम By Bodhavriksha हमने सुना है कि प्रेम एक प्यारा अनुभव है। बहुत किस्से-कहानियाँ हैं। लोग कहते …
जो आत्म नहीं है, उसे उसी रूप में जानना आत्मज्ञान होता है। विचार आते हैं और जाते हैं, चीजें बदल जाती …
ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र मंत्र के बोल : ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः भगवान कृष्ण को समर्पित इस ‘ओम नमो …
“नमस्कार” और “नमस्ते” क्या हैं? भारतीय संस्कृति में हम किसी का अभिवादन करने और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए …
मन अनेक इच्छाओं, लक्ष्यों और बाहरी आकर्षणों के कारण भटकता रहता है। वह भविष्य की चिंताओं और अतीत की स्मृतियों में …