आत्म-अवलोकन क्या हैं, क्यों आवश्यक और कैसे करें?
आत्म-अवलोकन से मनुष्य उस अवस्था तक पहुँच जाता है जहाँ जानने के लिए कुछ शेष नहीं रह जाता। यही सर्वोच्च आनंद …
आत्म-अवलोकन से मनुष्य उस अवस्था तक पहुँच जाता है जहाँ जानने के लिए कुछ शेष नहीं रह जाता। यही सर्वोच्च आनंद …
साधकों, परा विद्या और अपरा विद्या क्या हैं? इनमें क्या अंतर है? मुण्डक उपनिषद के में विद्वान ऋषि अंगीरथ इसका उत्तर …
इस लेख में मैंने शिव स्वर्णमाला स्तुति ‘ईशगिरीश नरेश’ के संपूर्ण बोल, प्रत्येक श्लोक का सरल हिन्दी अर्थ तथा इस स्तुति …
निराकार का ध्यान कैसे करें? निराकार पर ध्यान देने का अर्थ बस इतना है कि आप आकार पर ध्यान नहीं दे …
माया कैसे बनती है? क्या माया आपसे ही उत्पन्न होती है? माया का कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता। उसका अपना कोई …
मन विचलित हो जाता है जब हम कोई कार्य हाथ में लेते हैं, पर उस पर एकाग्र होकर काम नहीं कर …
मेरा मन व्याकुल क्यों होता है? देखिए, मन केवल आपका ही नहीं, अधिकांश लोगों का व्याकुल होता है। मन स्वयं को …
जहाँ मन टिक जाता है, वह माया है; जिसका दूर जाना ही दुख और भय है, वह माया है। माया के …
योग में ‘समाधि’ किस अवस्था को कहते हैं? बुद्धि के सम हो जाने को समाधि कहते हैं, ‘सम’ कर ‘बुद्धि’ । …
इस लेख में मैंने भगवान शिव की प्रसिद्ध ‘नमामि शमीशान’ स्तुति – रुद्राष्टकम् के संपूर्ण बोल, सरल हिन्दी अर्थ तथा उसके …
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