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‘प्रज्ञानं ब्रह्म’ महावाक्य आपको क्या संदेश देता हैं?

by BodhaVriksha

प्रज्ञानं ब्रह्म भी अद्वैत परम्परा के चार महावाक्योंमें से एक अत्यंत महत्वपूर्ण महावाक्य है, जिसके प्रचार और व्यवस्थित दार्शनिक प्रतिपादन का श्रेय आदि शंकराचार्य को जाता है। यह महावाक्य मूल रूप से ऋग्वेद के ऐतरेय उपनिषद में प्राप्त होता है, …

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‘योगः चित्त वृत्ति निरोधः’ से महर्षि पतंजलि क्या सिखा रहे हैं?

by BodhaVriksha

“योग चित्त वृत्ति निरोध का अर्थ है मन की चंचल और परिवर्तनशील वृत्तियों का शांत हो जाना। जब साधक विचारों से तादात्म्य छोड़कर साक्षी भाव में स्थित होता है, तब वह अपने वास्तविक स्वरूप का अनुभव करता है।” योग चित्त …

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चार-महावाक्यों से स्वयं को पाने की यात्रा कैसे शुरू होती है?

by BodhaVriksha
How do the Four Mahavakyas open the path to self-realization?

“यह लेख अद्वैत वेदांत के चार महावाक्यों के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार की उस भीतरी यात्रा को स्पर्श करता है, जहाँ साधक देह और अहंकार की सीमाओं से परे जाकर शुद्ध चेतना को पहचानता है। यह आत्मा और ब्रह्म की एकता …

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जीवन में इतना दुख क्यों हैं?

by BodhaVriksha
suffering in life

इस संसार में निवास करने वाले सभी जीव सदा अपने सुख की ही कामना करते हैं। हर कोई चाहता है कि उसका जीवन आनंदमय और शांतिपूर्ण हो। लेकिन हमारी अज्ञानता के कारण हम यह नहीं जान पाते कि वास्तविक सुख …

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